रात लम्बी थी….

रात लम्बी थी, गहरी थी
नज़्म छोटी थी
अँधेरी परछाइयों में सिमटी हुई।
ज़ुबाँ पर आती, सुकून मिलता
मानो घिरे बादलों में कुछ टिमटिमाते तारे।

भोर होने को थी
नज़्म इज़ाज़त लेती हुई
छोड़ जाती पीछे यादों की दास्ताँ
फिर वही चर्चे, मुखौटो – सी मुस्कान
ज़िन्दगी करवटों के दरमियाँ
फिर से, अंगड़ाइयों के आँचल में।

रात लम्बी थी, गहरी थी
नज़्म छोटी थी।

कुछ नग्मे

कुछ नग्मे हम सुनाएँगे तुम्हे तकलीफों के
कुछ अकेलेपन की दास्ताँ तुम भी बयां करना ।

यह वक़्त ही है गुजर जाएगा
थोड़ा सब्र से दीदार करना ।

कुछ नग्मे हम सुनाएँगे तुम्हे तकलीफों के
जब ज़ंजीरो में थी करुणा
घोर अंधकार बीच भोर सवेरा।

करवटों की रुस्वाइयाँ या
प्रतिबिंब की गहराइयाँ ।
बस आक्रोश शुक्रगुजार का
थोड़ा वक़्त है इंतज़ार करना ।

चुनावी पहेली….

इस चुनावी पहेली को हम इस तरह सुलझाते हैं
उनकी जीत को हम EVM की हार बताते हैं ।

जो इरादे न झूठे थे, न जूठी थी जनता
EVM को भला क्या पड़ी थी, मोदी हो या ममता ।

Diwali

रौशनी से हर मंज़िल की शुरुआत होती है
जगमगाती ज़िन्दगी से हसीं मुलाकात होती है ।
कुछ पल रंग -बिरंगी रंगोली में जीती ज़िन्दगी
यहीं से हर आशाओं की फरियाद होती है ।

પર્યુષણ મહાપર્વ

કરો,
પાપ નું નિવારણ પશ્ચાતાપ થી
અને હૃદય નું નિવારણ મહામંત્ર ના જાપ થી ।

ચૂકાય નહિ, મુકાય નહિ
એવો અવસર આવ્યો છે ફરી વાર
આ પર્યુષણ મહાપર્વ ની મહિમા અપરંપાર ।