बंधन है यह धागों का

बंधन है धागों का
न भूलना कभी।

बचपन की नन्ही- सी यादों का झरोखा
सिमटा है इनमे कहीं
न भूलना कभी।

धागे भले हैं
पर कच्चे नहीं
स्नेह की आंच में
तपकर तैयार
न भूलना कभी।

हर एक साल
फिर नए धागे
बांधे न सिर्फ कलाई
आशाओं की डोर भी
संग लिए बांधे
न भूलना कभी।

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