वैलेंटाइन डे !

वैलेंटाइन डे कैसे मनाएँगे
इस दुविधा में जाने
कितने आशिक़ खो जाएंगे ।
होगा एक फूल
न जाने कितने माली ।
भरेगी झोली किसकी
किसकी रहेगी खाली !

कितनी दुविधा भरी कहानी
लाल फूल ही क्यों प्यार की निशानी ?
फूल जो उसे रास न आया
न जाने कितनी गोरियों पर
वही गुलाब आजमाया ।
खाए थप्पड़ कई,
देखे चप्पल भरमार
दिल दिमाग से पूछता
क्या यही है प्यार ?
क्या यही है प्यार ?

इस दिन का मोल तो कुछ समझ न आया
प्यार का भी कोई दिन
होवत है भाया ?
गुलाब से ही जो प्यार दिख जाता
शाहजहाँ मुमताज़ खातिर न ताज महल बनवाता ।

हम तो कहत हैं भइया
छोड़ो ढोंगी प्यार का ताना – बाना ।
सच्चा प्यार मिले जो माँगे
लाल गुलाब फिर क्यों आज़माना ?

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