यादें

कुछ यादें छोड़ आईं
कुछ लम्हें तोड़ लाईं।
कुछ भरे सपनो के लिबास में
कुछ तमन्नाएँ बस गई अहसास में।

कुछ सुनहरी यादें छोड़ आईं
कुछ बीते लम्हें तोड़ लाईं ।

कुदरत का फ़साना

आज मौसम बड़ा सुहाना सा लगता है
गुजरा हुआ जैसे एक ज़माना सा लगता है
कल तक सज़े थे जैसे राहों में काटें
वही आज कुदरत का फ़साना सा लगता है ।

એક જમાનો

એક જમાનો ગુજરી ગયો
જીવન નો અફસાનો ગુજરી ગયો ।
હજી કાલે તો જીવન રમત ની વાત હતી
આજે જીવન માં રમત થાઈ છે ।
કદાચ આ શૈલી ને
જીવન કહેવાય છે ।

बदनाम इलेक्शनवा

चोरी, लूटपाट
बदनामी का पहनत लिबास है
फिर भी नेताजी कहत
होवत प्रदेश का विकाश है।

जाने कितनी हाथियों की मूरत
बदली न दलितों की सूरत
फिर भी बहनजी कहत रही
करत दिन- रात बेजोड़ प्रयास है।

कल भैय्याजी भी तनिक मूड में
फुके चुनाव प्रचार का बिगुल वा।
कहत रहिन
काम- काज जो किये इतने साल
वोट देना हमरा को
दिखाना है और भी कमाल।

कुछ समझ न आवत
एक कुआँ, दूजा खाई
कईसन होए हमार प्रदेश की भलाई।

नज़र

ऐ वक़्त बुरी नज़र न लगाना
अब पिघलने की आदत कहाँ ।
वीरानगीयों में छुपे घाव
और धूप बिन छाव में
दर्द समाया गहरा था ।

आज साँसों और धड़कन का
जैसे मिलन एकाद हो गया
ऐ वक़्त तेरी रफ़्तार में
अँधेरा जैसे कहीं खो गया ।

ऐ वक़्त बुरी नज़र न लगाना
सख्सियत को तक़दीर से
फिर न आज़माना।

ऐ वक़्त बुरी नज़र न लगाना ।